पेड़ो केजड़ों सी होती हैलोगों की सूझ-बूझजितनी गहरी होती हैउतना ही कम सींचना पड़ता हैं ।।~विवेक चतुर्वेदी |
पेड़ो केजड़ों सी होती हैलोगों की सूझ-बूझजितनी गहरी होती हैउतना ही कम सींचना पड़ता हैं ।।
~विवेक चतुर्वेदी |