बुरा न मानना कि हम गले नहीं लगते

सुनो मेरी भले हैं  हम भले नहीं लगते


है हाल अब गुलों का, जब से छोड़ा भौरौं ने 

वो खिलते हैं मगर अब वो खिले नहीं लगते


लकीरें दिख रही थी उनके हाथ में उभरी 

मले हो हाथों को पर वो मले नहीं लगते


बदल चुके हैं यहाँ लोग इस कदर से की 

मिले थे जो मुझे अब वो मिले नहीं लगते ।।


-विवेक चतुर्वेदी

@vivekch18670619