वो आए हमारी महफ़िल में दिये गुलज़ार लिए महफ़िल रोशन भी न हो पाई वो इतरा कर चल दिए, हमें इंतज़ार था उनका बड़े इत्मिनानो से वो हमारे इंतज़ार का इम्तिहान ले कर चल दिए, सोचा कि पूछ ले कि क्या नराज़ है वो हमसे और इस जमाने से वो हमें हमारी और इस जमाने कि दुहाई दे कर चल, इशारो मे कोशिश की रोकने कि उन्हें वो हमारे इशारो को दरकिनार करके चल दिए, कोशिश की याद करने कि अपनी ख़ता वो तो हमें दिल से निकाल चल दिए, वो आए हमारी महफ़िल में दिये गुलज़ार लिए महफ़िल रोशन भी न हो पाई वो इतरा कर चल दिए।