विगत वर्षो से

रुक्मणी है वो मेरी

और मैं उसका कान्हा

उसके प्रेम पर था

इकछत्र अधिकार

सब कुछ छीन लिया

तुम्हारी एक दंतुरित मुस्कान ने

अब वह यशोदा बन बैठीं है

तुम्हारे ही प्रेम मे

तुम ही हो उसके श्याम