मेरे साथ आया है वो इस रंगमंच पर
मेरे संग खेलेगा जिंदगी के सारे खेल
अलग हो गया है वो कुछ पहर के लिए
देह के संग जलकर फिर से होगा हमारा मेल
जानता हू सब कुछ उसके बारे मे
सच है कि कुछ नहीं जानता मैं
बुझना चाहता हू उसकी जटिलता को
हर बार उसकी सरलता मे उलझता मैं
जीने की आरज़ू में तप रहा हू
शीतलता की छाँव लिए बाट जोहता
भौतिक सुख की चाह मे घिसता मेरा तन
उसके आलिंगन मे चैन की नींद सोता
मुझे चाहिए पैसा, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि, नामवरी
मैं जानता भी नहीं ये सब है मात्र खिलौना
संबंध ना तोड़ दूँ उसका साथ ना छोड़ दूँ
जीवन प्रारंभ बिंदु पे कर लिया है उसने गौना
मेरी प्रेयसी नहीं है वो अपरिहार्य मरण है
मैं दिवस का प्रकाश थामकर भी हू अधूरा
अंधेरी लंबी ठंडक भारी रात्रि सा आकर लिए
भोर के संगम मे करती मेरे अध्याय को पूरा


