रात स्याह है
अँधेरे से डर लगता है
ठण्ड हवा की ठिठुरन
अँधेरे की चपेट में पूरा जीवन
रात गहरी होते ही
कुत्ते भौकेंगे, भेड़िये चिल्लायेंगे
मांस का हर लोथड़ा
नोचेंगे, काट खाएंगे
सुबह थानेदार आएगा
कानून में फसायेगा
लट्ठ मार मार के
वर्दी की घौंस जमायेगा
कुछ नेता भी आएंगे
कोई रोयेंगे, शोर मचाएंगे
कुछ पक्ष-विपक्ष को कोसेंगे
वापस जाके महलो में सो जायेंगे
राजा का भी बयान आएगा
"मुजरिम को पकड़ने को
फलां फलां पुलिस बल बनेगा"
यह खबर सुन के
मुजरिम कोने में हसेगा
सब मिलके तमाशा देखेंगे
कुछ संवेदना का छद्म करेंगे
कुछ हसेंगे
फिर डकार मार के सो जायेंगे
रोयेगी, सिसकेगी यह जनता हमारी
घुट घुट के अपमान सहेगी
कुछ दिनों के बाद सब भूल के जनता हमारी
राजा के चरणों में सो जाएगी
मै समाज, नियम, कायदे-कानून
को कोसूंगा, ट्वीट करूँगा, लेख लिखूंगा
बंद कमरों से, एक हाथ में कलम पकड़े
दूसरे से कॉफ़ी मग पकड़े
अंत में सब मौन हो जायेंगे
कब्र में दफनाई लाश की तरह
कीड़े हमारे शरीर को चाट जायँगे
हमारी चुनी सरकार की तरह
©विश्वदीप गौतम "बदहवास


