
पढ़ें और भूल जाएं!!!
(बंजर पड़ी जमीन में एक बीज बो रहा हूं, मुझे पता है)
•बड़ी शिद्दत से जिस ग्रुप को बनाया था,
साथ मिल कर एम०ए० के नौनिहालों ने,
आज उसकी प्रासंगिकता है खतरे में,
सनद रहे कि कहीं "NAM" न हो जाए वक्त के थपेड़ों में,
•पहले नाम बदला,
फिर डीपी,
फिर बदले लोग, और संख्याबल बदला,
आज "लिंक शेयरिंग" के सिवा कुछ भी नहीं,
आज कक्षा की सूचना के सिवा कुछ भी नहीं,
•"सर आयेंगे?", "सर जाएंगे?" "क्लास नहीं होगी?", और "किसका असाइनमेंट पूरा हुआ है"?,
से आगे न बढ़ पाए!
अफ़सोस कुछ भी नहीं,
बस व्हाट्सएप के चैट पर एक अनायास सा भ्रमित ग्रुप यूहीं भ्रमण करता है,
बस याद दिलाता है, कि सदुपयोग क
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