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#रामलला:

ऐलान हुआ जिस भगवे का,लहराना होगा उस झंडे का,

जिसमें आर्यावर्ती शान सजे,बसते रघुकुल "औे" राम सजे,

पावन बनती है वह वसुंधरा,

बाबा का सावन, फ़िर "मर्यादा" की अयोध्या!


"मर्यादा" सागर सा है, तो पौरुष ज्वाला सी लगती,

वाणी वह शीतल छाया, तो बाणों में क्रोधानल काया!

नाम लिए जा, जाप किए जा, आदर्शों को चरितार्थ करे,

रामकथा सुनता यह भारत, अयोध्या मानचित्र पे आज सजे!


दुनिया देखे अभिमान धरा की,परचम जिसका लहराता है,

गौरव करता है सिंहनाद, प्रत्यंचा जब वह चढ़ाता है, संस्कृतियां जिसकी अडिग,अपार, मूल्यों, आदर्शों में राम ही राम,

भक्त उन्हीं का आया कोई और नहीं बस हनुमान।


नगर की माटी सजेगी तब, जहां

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