मूकप्रेम!'s image

#मूकप्रेम!


राह में यूं चलते हुए एक कली पर नज़र पड़ी,

देख, ठेहरा मन, फिर जाके उसपर लड़ी,

जैसे पवन वेग से एक झंकार सुनी,

रोम पर छाई जैसे सुमन रंजनी!


हृदय की धड़क पर इठलाता हूं मैं,

जैसे सीढ़ियों को ही पाके, फ़िर मंज़िल मिले,

पास सोचा की जाऊं, गुफ्तगू भी पले,

प्रेमी बनके हुआ उसका मारा हूं मैं!


तेरी झलक से हुआ मन सुधा की वह माला,

पर जब औरों को देखूं तो लगे विष प्याला,

जैसे हाला में मदमस्त होता दीवाना,

अब तो ठानी है, पीके रहूं मधुशाला


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