#मनुष्य: मात्र पूर्वजों का आइना


"ऐ मनुष्य, क्या, कभी खुद को आइने में देखा है?

अपने पूर्वजों से बेहतर ज़रूर बन गया है,

अपने कार्यों से विकसित ज़रूर हो गया है,

पर भूलता है क्यूं, कि वानरों से तू निकला,पर जबसे 'सभ्य' बना, 

तबसे 'अहं' हो गया है।


हो सके, तो खुद का परीक्षण भी कर,

अहं को तजो, निज का निरीक्षण भी कर,

भविष्य दृष्टिगत, वर्तमान जीकर,

हो सके तो अतीत से संकल्प कर,

कि अब नहीं मैं चलूं, औरों को छोड़कर कर!


साथ बढ़ता भी चल, सबको लेता भी चल, 

जैसे वानरों की सेना है चलती जिधर,

मुर्दे बच्चे को भी वक्ष में लेते हुए, 

तू भी लेता चले मनुष्यता की तरफ!

यही तुझको देंगी, प्रगति का शिखर।


देख ले अब ज़रा खुद को आइने में मगर!"

~विष्णुकांत चतुर्वेदी~✍️✍️✍️