तुझे याद करता हूँ, चुपके चुपके रोता हूँ, ऐ-गाँव क्या तू भी मुझे याद करता है। बड़ा बेशर्म शहर है, तुझे बदनाम करता है, तेरे यहाँ के लोगों को गवाँर कहता है। मैं मर जाऊँ पर यहाँ न आऊँ, तेरे पास सदा रह जाऊँ, पर वजूद हमारा है जहाँ में, यह इनको बतलाता हूँ, डटा शहर में बेटा तेरा किस्से अपने गढ़ता हूँ।।