उसको जाने ऐसा कौन मिला होगा

किससे मिलकर मुझको वो भूला होगा


मुझको ऐसे छोड़ कर ना जाता वो

मेरे अंदर ही कोई मसअला होगा


शाखों से जो पत्ते टूटके गिर जाते

उनको भी तो ग़म जुदाई का होगा


एक चुभन का आधे दिल पे कब्ज़ा है

जो  घुटन  आएगी  तो  पूरा होगा


तू रहेगा कब तक ऐसे ज़िंदा विष

हाय लगे है डर अब तेरा क्या होगा