
बीती कई रातों से,
नींद नहीं आती है।
दिल-औ-दिमाग के बीच कहीं,
जान अटक जाती है।।
प्यार में नींद,
उड़ जाने की बातें,
मैंने भी सुनी हैं।
मेरे साथ लेकिन,
ऐसा कुछ नहीं है।
मुझे किसी कली से,
प्यार न हुआ है।
मगर यह पहली,
मर्तबा हुआ है।।
कि बीती कई रातों से,
नींद नहीं आती है।।
एक डर सा,
सीने में,
घर कर गया है।
कुछ एक लोगों का,
मेरे लिए कुछ एक ,
विचारों का होना।
कहर कर गया है।।
एक माता-पिता हैं।
और एक मैं हूँ।
बीच में कुछ एक,
कॉपी-किताबें हैं।
कलम पर उम्मीदों का,
पुल बना हुआ है।
पता नहीं मुझे,
क्या कुछ हुआ है।
कि बीती कई रोतों से,
नींद
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