हवाओं से जाकर कह दो, अपना रुख मोड़ लें,
मौत गर आनी है तो आजाएगी, चलो अभी से कफन की चादर ओढ़ लें।
यूँ दुश्वारी में जीना कब तक मुनासिब होगा, ऐ 'विशाल',
मल्लाहों से जाकर कह दो, अपनी नांव, पतवारें खोल लें।
आओ सब मिलकर सागर पर वॉर करें,
हर बूँद हो अपनी मुट्ठी में, ऐसी लड़ाई मोल लें।