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मानवी अकांक्षा

vishalmaurya904944vishalmaurya904944 February 2, 2023
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मानवी अकांक्षा!


मानव तुमने जो पाया,

वह कम पाया।

थोड़ा-बहुत जमी और,

क्या पाया।

नूतन-नूतन खोज तुमने

कर के दिखलाया

जा कर आया चंद्रलोक से

मंगलयान भी न बचपाया

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