
याद आती गयी और मैं बैचैन होता रहा....
नींद आई नहीं फिर भी मैं युहीं सोता रहा …
ख्वाब आते और खो जाते....
सिलसिला यूँ चलता रहा…
मैं पागल ना जाने क्यों ख्वाब संझोता रहा।
पर इरादा ना ये बदला…
ना आँखे मेरी थकी....
ना कुदरत ने कुछ किया और ना हवा कुछ कर सकी....
झोंके आए पल दो प
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