ऐ बेखबर सुन मुझे, क्या मुझसे हैं गिला कोई? हैं मुझमें कोई कमी..... या मुझसे बेहतर मिला कोई? मेरी आँखों में वही बयां, जो हैं दिल में छुपा हुआ क्यों ना दिखें वो चेहरा तुझे, जो हैं दिल पे छपा हुआ मुझे तेरे इश्क़ में नुकसान हुआ... ना कोई नफा हुआ मैंने चाहा जितना तुझे... क्यों तू उतना खफा हुआ? संगीत मैं भुला नहीं , सरगम तू जाने नहीं खुश रहता हूँ बस इसीलिए , क्योंकि गम तू जाने नहीं मेरे आँसू दिखे तुझे, उम्मीद ये आज भी हैं गले लगाकर कहदे मुझे, क्यों ज़िद ये आज भी हैं? पागल हूँ जानता हूँ , पर तेरी यादें पास रखू विशाल तेरे दिल में , एक कोने की आस रखू रोता हूँ तेरे लिए, तेरी ख़ुशी में उल्लास रखू अपनी साँसों में तेरे नाम कुछ साँस रखू । तेरे संग जीने की ख्वाहिश थी... अब मरने का इरादा हैं बेखबर खबर हो तुझको... मुझे कबूल तेरी खुशियां ज़्यादा हैं। इसलिए... तेरी ख़ुशी के नाम ज़िंदगानी अपनी लिख दी मैंने किस्मत की लकीरें ही नाम तेरे लिख दी। बस, मर जाऊ इससे पहले, एक बात बता देना क्या था मैं तेरे लिए, तू यही जता देना मेरी आवाज़ नहीं पहुँची, या मुझसे था गिला कोई? थी मुझमें कोई कमी..... या मुझसे बेहतर था मिला कोई?