हे ईस्वर,
क्यों मैं तेरे द्वारे आउ, क्यों मैं आकर शीश झुकाउ।
तूने ऐसा किया ही क्या है क्यों मैं जय-जयकार लगाऊ।
माँ कहती है, इस दुनियाँ में सब कुछ तेरी मर्जी से होता है,
तो क्या दामिनी का बलात्कार तुने ही करवाया था।
उसे उस बस तक तूने ही पहुचाया था।
और उस रात कुछ इंसानों को हैवान तूने ही बनाया था।
और अभी-अभी अलख़ाक को चलती रेल से तूने ही फिकवाया था।
1984 में सिक्खों को तूने ही कटवाया था।
और 2002 में गोधरा कांड भी तूने ही करवाया था।
देश आज़ाद होते ही भारत के लोगों को हिन्दू-मुसलमान तूने ही बनाया था।
और कभी न ख़त्म होने वाला भारत-पाकिस्तान का झगड़ा तूने ही करवाया था।
हे ईस्वर,
क्यों मैं तेरे द्वारे आउ, क्यों मैं आकर शीश झुकाउ।
तूने ऐसा किया ही क्या है क्यों मैं जय-जयकार लगाऊ।
माँ कहती है, तू ऊपर बैठा सब कुछ देखता रहता है।
तुझे देखना ही है तो तू संभोग देख, ये ऊपर बैठ कर बलात्कार देखने का तेरा शौक़ ठीक नहीं है।
तुझे देखना ही है तो तू इंसानों का प्रेम देख, ये क़त्लेआम देखने का तेरा शौक़ ठीक नहीं है।
तुझे देखना ही है तो तू मुस्कराते हुए खुबसूरत चेहरे देख, यूँ तेज़ाब से बिगड़े हुए चेहरों को देखने का तेरा शौक़ ठीक नहीं है।
तुझे देखना ही है तो तू नन्ही बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान देख, यूँ गर्भ में ही उनके टुकड़े देखने का तेरा शौक़ ठीक नहीं है।
तुझे देखना ही है तो तू दिलों के मिलन का खेल देख, यूँ लोगों को रुलाने का तेरा शौक़ ठीक नहीं है।