दोस्ती की हद तक जाकर वापस लौट रहा हूँ मैं....

कुछ एहसासों को रिश्ते बनाकर लौट रहा हूँ मैं....

हाँ ये एहसास नया है, हाँ ये बेचैनी नई है...

इन बेचैनियों को आप समेटकर लौट रहा हूँ मैं...

आँखों में ख़्वाब बड़े है, आँखों में समंदर भी है...

दोनों के साथ जकड़कर वापस लौट रहा हूँ मैं...

की तुम मत आना मुझसे मिलने आँखों में पानी लेकर...

ये आँखों की गुस्ताखियाँ नही, आँखों से खेल रहा हूँ मैं....

दोस्ती की हद तक जाकर वापस लौट रहा हूँ मैं....