बड़ी नायाब थी, एक टुकड़ा महताब था उसका..
उसके होठों पे लगा तिल खिताब था उसका...
आँखें समंदर थी, ज़र्रा ज़र्रा तिश्ना था जिसका...
वो सच में हुस्ना थी या हुस्न नकाब था उसका.....
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बड़ी नायाब थी, एक टुकड़ा महताब था उसका..
उसके होठों पे लगा तिल खिताब था उसका...
आँखें समंदर थी, ज़र्रा ज़र्रा तिश्ना था जिसका...
वो सच में हुस्ना थी या हुस्न नकाब था उसका.....
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