पल पल बदलती तेरी फितरत, क्यूँ मैं जान न पाया। 

तेरे ये बदलते हुए रंग, क्यूँ मैं पहचान ना पाया। 

हसरत ही रही खुशियों की, बस दर्द ही मैंने पाया। 

बहुत मन को भी समझाया, हर रुप में तुझे आजमाया।

इक बेबसी सी दिखी मुझमें, लाचार हो चली मेरी काया।

घाना हो गया कोई साया, ज़िन्दगी तू मुझे बांध न पाया।