ये कौन, जो देता दस्तक, छू कर हवाओं के साथ
ये कौन है, जो चलता, डालकर हाथों में मेरे हाथ
ये क्या, जिसकी न मुझे कोई सुध, न कोई खबर
तेरी जुल्फ के साये, खुशबू का, है ये कैसा असर


ये कौन, जो देता दस्तक, छू कर हवाओं के साथ
ये कौन है, जो चलता, डालकर हाथों में मेरे हाथ
ये क्या, जिसकी न मुझे कोई सुध, न कोई खबर
तेरी जुल्फ के साये, खुशबू का, है ये कैसा असर