अल्फ़ाज़ हैं चुपचाप से,पास अजनबी सा कोई हाथ।जुल्फ हैं के कहते जाते,आहिस्ते से हवाओं के साथ।नजर ठहर जाती तुम पर,ठहर सी गई है अब ये रात।अनजान रहो लाख तुम मगर,कुछ तो है तुम में बात।
अल्फ़ाज़ हैं चुपचाप से,पास अजनबी सा कोई हाथ।जुल्फ हैं के कहते जाते,आहिस्ते से हवाओं के साथ।
नजर ठहर जाती तुम पर,ठहर सी गई है अब ये रात।अनजान रहो लाख तुम मगर,कुछ तो है तुम में बात।