ख़्वाब पलते आंखों में, नज़रें ढूंढती उन्हें इधर उधर।
वादों का ये दर, चहकता घर, फूलों से भरा ये डगर।
वसंत की ये लहर, पीली सरसों और नरम दोपहर।
कुक भरती कोयल,आमों के सौन्दर्य से भरा मंजर।
सुर्ख़ होंठों का कहर, हाथों का ये दहकता असर।
मुश्किल सी डगर, बड़ा नाज़ुक प्यार का ये सफर।


