नम सी आंखों के तल ख्वाबों को बदल बदल
हर सुबह ढूंढता रहता ये मन उजालों के कल
अजीब सी उलझने सारी मिलता न कोई हल
नीले आसमान का छल उस पर सफेद बादल


नम सी आंखों के तल ख्वाबों को बदल बदल
हर सुबह ढूंढता रहता ये मन उजालों के कल
अजीब सी उलझने सारी मिलता न कोई हल
नीले आसमान का छल उस पर सफेद बादल