ये उलझनें, ये बिखरे मन से भागती जिदंगी के खोज।

ये अदावतें, ये संभाले न संभलते टूटते रिश्तों के बोझ।

ढूँढता फिरता हूँ खुशियाँ, लहरों पर इठलाती वो मौज।

मैं बाजार से सामान लाकर घर अपना सजाता हूँ रोज।