तुम तो बस ज़माने की खातिर,उसके दर,उस शहर में रहते हो।'s image
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तुम तो बस ज़माने की खातिर,उसके दर,उस शहर में रहते हो।

बेखबर से तुम रहते हो, फिर भी दुनियाँ की खबर में रहते हो।

दुर मीलों हमसे रहते हो, फिर भी हमारी इस नजर में रहते हो।

बदलते हुए मौसम के तुम हर पुलकित, हर्षित असर में रहते हो। 

कभी जाड़े की धूप में, कभी रिमझिम बरसती दोपहर में रहते हो

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