बेखबर से तुम रहते हो, फिर भी दुनियाँ की खबर में रहते हो।

दुर मीलों हमसे रहते हो, फिर भी हमारी इस नजर में रहते हो।

बदलते हुए मौसम के तुम हर पुलकित, हर्षित असर में रहते हो। 

कभी जाड़े की धूप में, कभी रिमझिम बरसती दोपहर में रहते हो।

हवाओं संग आती खुशबू , नदियों में,समंदर की लहर में रहते हो। 

कभी चाँद बन असमान में, कभी हमारे दिल के घर में रहते हो।

तुम तो बस ज़माने की खातिर, उसके दर,उस शहर में रहते हो।

तुम तो बस ज़माने की खातिर, उसके दर,उस शहर में रहते हो।