बात छुपती कहाँ अब, बातों में भुलाने से।
जख्म भरता कहाँ अब, मन को मनाने से।
एहसास मरता नहीं, दिल को यूँ बहलाने से।
खयाल आ ही जाता तेरा, नींद के बहाने से।


बात छुपती कहाँ अब, बातों में भुलाने से।
जख्म भरता कहाँ अब, मन को मनाने से।
एहसास मरता नहीं, दिल को यूँ बहलाने से।
खयाल आ ही जाता तेरा, नींद के बहाने से।