ढलती उम और हमारे चेहरे पर सिलवटों से गम।किस किस से बताएं,कब कैसे,कितने टूटे हैं हम।मायूस करती उलझने ज़िन्दगी की,आँखें हैं नम।कैसे कहें,कौन से वक्त,किन रिश्तों से छूटे हैं हम।
ढलती उम और हमारे चेहरे पर सिलवटों से गम।किस किस से बताएं,कब कैसे,कितने टूटे हैं हम।
मायूस करती उलझने ज़िन्दगी की,आँखें हैं नम।कैसे कहें,कौन से वक्त,किन रिश्तों से छूटे हैं हम।