उल्फतों का वो दौर जब गुजर गया।

बाग वसंत स्वपन सारा उजड़ गया।

रेशमी ख्वाब बुनने का बहाना लिए।

जी रहे हम याद में वो जमाना लिए।

गुजरे हुए वक्त का वो फ़साना लिए।

चलते रहे हम कुछ नया पुराना लिए।

दरमियां दूरियों का ताना-बाना लिए।

जिंदगी नया दौर, नया ठिकाना लिए।