दौरे उल्फत वो गुजरे पनाहों में जैसे

कहां रोक पाता मैं उन्हें राहों में ऐसे

उतर चांद रौशन हुआ चेहरे में जैसे

कौन बन्द करे इन्हें निगाहों में ऐसे

खुशबू बन वो रहती हवाओं में जैसे

कौन भर बाँध पाएगा सांसों में ऐसे

एहसास रूह महसूस करता हो जैसे

प्रीत से जीत लाए कौन बाँहों में ऐसे

विशाल