फकत ये इशारे तुम्हारे, मन मचल मचल जायेगा।रागिनी भावों की, हवा अब चुपके से गुनगुनायेगा।अदाएं ये तुम्हारी, कोई मौज कहां संभाल पाएगा।उड़ा जो आंचल तेरा, सर पर मेरे इल्जाम आएगा।
फकत ये इशारे तुम्हारे, मन मचल मचल जायेगा।रागिनी भावों की, हवा अब चुपके से गुनगुनायेगा।
अदाएं ये तुम्हारी, कोई मौज कहां संभाल पाएगा।उड़ा जो आंचल तेरा, सर पर मेरे इल्जाम आएगा।