बादलों के ओट लेकर सूरज जैसे छुपता निकलता रहता है।
लहर आस का कोई हर पल मुझमें उठता मचलता रहता है।
जिंदगी के भंवर से वजूद मेरा हर रोज यूंही लड़ता रहता है।
नदियों सा चेतन मन समन्दर के विस्तार में मिलता रहता है।


बादलों के ओट लेकर सूरज जैसे छुपता निकलता रहता है।
लहर आस का कोई हर पल मुझमें उठता मचलता रहता है।
जिंदगी के भंवर से वजूद मेरा हर रोज यूंही लड़ता रहता है।
नदियों सा चेतन मन समन्दर के विस्तार में मिलता रहता है।