महफूज़ रक्खा, दुनिया ने तुम्हें दीवारों में कहीं।
पर चांद बन, झरोखों पर तुम नजर आती रही।
चली जो हवा, बन खुशबू तुम आती जाती रही।
कुछ थे खास तुम, के जिंदगी तुम्हें बुलाती रही।


महफूज़ रक्खा, दुनिया ने तुम्हें दीवारों में कहीं।
पर चांद बन, झरोखों पर तुम नजर आती रही।
चली जो हवा, बन खुशबू तुम आती जाती रही।
कुछ थे खास तुम, के जिंदगी तुम्हें बुलाती रही।