आए चाहे कितनी भी कहर

मत घबराना चट्टानों से लड़ लड़

भुजाओं में ले बल

आंखों में स्वप्न भर

बढ़ना तुम लहरों से उठकर

मन में थोड़ा धीरज धर

रात हो या दोपहर 

चलना तुम जीवन की डगर