ख्वाबों के मंज़र झर गए, बहती तेज हवाओं के कहर से।
दर्द भी अब बढ़ने लगा है, सुलगती हुई बातों के असर से।
पकड़ कर हाथ मेरा, जिंदगी यूं ले चली मुझे उसके दर से।
मैं एक धुंधली सी याद बन, दूर होता गया उनकी नजर से।


ख्वाबों के मंज़र झर गए, बहती तेज हवाओं के कहर से।
दर्द भी अब बढ़ने लगा है, सुलगती हुई बातों के असर से।
पकड़ कर हाथ मेरा, जिंदगी यूं ले चली मुझे उसके दर से।
मैं एक धुंधली सी याद बन, दूर होता गया उनकी नजर से।