ये तारीखें, तरसती जिंदगी

जो हैं बीमार घर कब लौट आएंगे।

जो आता था, वक्त वे वक्त 

राह उसका, कब हम देख पाएंगे।

ये मातम, ये दुःख दर्द सारे

बिलखते लोग, कैसे भूल जाएंगे।

कल तक पानी, अब हवा

सांसें कितनी, हम खरीद पाएंगे।

बंद हैं, कफ़न की दुकानें 

ये जहमत, लाशें, कैसे उठाएंगे।