मिट्टी के घरौंदे आज हमारे घरों की रौनक बढा रहे हैं।
छतों की मुडेरों पर हम आशाओं के दीप जला रहे हैं।
दिये की ज्योति के ये भाव नव जीवन लिए आ रहे हैं।
नव कल्पना नयी सोच के प्रकाश पुंज जगमगा रहे हैं।
संकल्प भरे इस मन से घरा का अंधियारा मिटा रहे हैं।
विजयी हो राम घर आ रहे हैं हम दिवाली मना रहे हैं।
- विशाल
दीपावली की शुभकामनाएँ ...


