गर दायरे न यहाँ होते।पंछी की तरह उन्मुक्त हम इस जहां होते।फासले कितने भी अपने दरमियाँ होते।दोस्त तेरे पास हम वहाँ होते।
गर दायरे न यहाँ होते।पंछी की तरह उन्मुक्त हम इस जहां होते।
फासले कितने भी अपने दरमियाँ होते।दोस्त तेरे पास हम वहाँ होते।