कैसे काटें किससे बांटें बोझिल दिन ठहरी रातें

उलझते धागों से बंधे कठपुतलियों से खड़े हम

आंखों में अब सपनों संग आंसूओं को भरे हम

ये बता दे जिंदगी दर्द से और कितना लड़ें हम