सूखा देख घरती का आंचल, आसमां है भाव विभोरघन घन घटा घनघोर, छाया है अब अंधेरा चारों ओरचमकती जाती बिजली, गरजते हुए बादलों का शोरनाचने लगा जब मोर, आया रिमझिम बारिश का दौर
सूखा देख घरती का आंचल, आसमां है भाव विभोरघन घन घटा घनघोर, छाया है अब अंधेरा चारों ओर
चमकती जाती बिजली, गरजते हुए बादलों का शोरनाचने लगा जब मोर, आया रिमझिम बारिश का दौर