कभी ढूंढता रहा मैं जिसे ख्वाबो खयालों में।

कहीं ढूंढता रहा जिसे जिंदगी के सवालों में।

चढ़ता रहा सीढ़ियां,पहुँचा वहाँ शिखर तक।

भीड़ से दूर,मुश्किल से मेरी बात हुई।

आज कामयाबी से मेरी मुलाकात हुई।


रुका ऐसे सफर,मानों टुटा हो अरमानो का घर। 

सूनी सी जगह,अकेलेपन में,अंधियारी रात हुई।

भय खाती,नींद बिना,निर्जन में वो मेरे साथ हुई।

विवश सी,मर्म वेदना से मेरी बात हुई।

आज कामयाबी से मेरी मुलाकात हुई।