ख्वाईशें भर इस मन को, मौसम से बहाने दे।
नयी पत्तियाँ आने दे, फूलों को खिल जाने दे।
छुपा कर सूरज, बादलों को आज इठलाने दे।
बहुत तपी है ये धरती, अब बुंदें बरस जाने दे।


ख्वाईशें भर इस मन को, मौसम से बहाने दे।
नयी पत्तियाँ आने दे, फूलों को खिल जाने दे।
छुपा कर सूरज, बादलों को आज इठलाने दे।
बहुत तपी है ये धरती, अब बुंदें बरस जाने दे।