सांस से सांस का बंधन अनूठा टूट जाता है
हवा का साथ सांसों से कहीं तो छूट जाता है
कभी पलकों से आसूं तक की बूंदे सुख जाती हैं
निभाते हैं कोई रिश्ता तो कोई रूठ जाता है
- Vishal Patidar


सांस से सांस का बंधन अनूठा टूट जाता है
हवा का साथ सांसों से कहीं तो छूट जाता है
कभी पलकों से आसूं तक की बूंदे सुख जाती हैं
निभाते हैं कोई रिश्ता तो कोई रूठ जाता है
- Vishal Patidar