अब मिल जाती मंज़िल,तो चैन आ जाता!सफर ज़िन्दगी का अब खलने सा लगा है!चलते चलते रास्तों पर बीत रहे हैं दिन रात!जीवन का सूरज भी अब ढलने सा लगा है!!#विरेश✍
अब मिल जाती मंज़िल,तो चैन आ जाता!सफर ज़िन्दगी का अब खलने सा लगा है!चलते चलते रास्तों पर बीत रहे हैं दिन रात!जीवन का सूरज भी अब ढलने सा लगा है!!
#विरेश✍