टूट न जाये वचन पिता का,वन को चले गए वो राम!

प्रजा का मन न खिन्न हो कहीं,सोता छोड़ गये वो राम!!

माता के ही वर के कारण,माता को ही समझाया!

माता को ही फिर भी वहीँ पर,रोता छोड़ गये वो राम!!

जय सियाराम