जब सवाल ही पूरा नहीं तो जवाब दें किस तरह?

जो हमने ही पढ़ी नहीं वो किताब दें किस तरह?

ज़िंदगी का साहिल लगता है अभी दूर है!

हासिल ही कुछ नहीं तो खिताब दें किस तरह?


जो हो चुके हैं बेनकाब, उनको नकाब दें किस तरह?

पथराती हुई आँखों को अब वो हसीन ख्वाब दें किस तरह?

मंज़िल मिलेगी या नहीं, अब तो इस बात पर भी शक है!

जो कभी जोड़ा ही नहीं, उसका हिसाब दें किस तरह?


विरेश✍?