रोडवेज की बस में,
२ सीटर वाली तरफ,
खिड़की से लगे हुए उसे बैठे देखा,
पहले तो लगा जाऊँ,
कहूँ कि आप की वजह से,
हम जिंदा हैं,
फिर लगा अतिवाद हो जाएगा थोड़ा,
मैने दो घंटे के सफ़र में सात बार सोचा,
फिर बोल ही दिया "जय हिंद साहब",
माथे पे शिकन लिए,
जैसे कोई दशक भर की कड़वाहट से,
उन्होने मुझे वापस कहा "जय हिंद जी" सिलसिले चले बातों के,
बच्चे का दाखिला कराने आए थे,
छुट्टियों में,
आज वापस जाना था,
मैने भी ताँव में थोड़े बोल दिया,
"बहुत गर्व हैं हमे आप पर" जैसे चिढ़ गये वो,
कहने लगे कब से?
जब से सरकार के भाषण में शहीदो का ज़िक्र होता है,
या जब से सरहदों पे शहीदो का नाम रोज अख़बार के पहले पन्ने पर आता है?
गुस्से में बोले सैनिक नही हूँ सर मैं ,
बाँट हू तराजू का,
लोग तोलने में इस्तेमाल करतें हैं मुझ को,
कभी आम लोगो से,
कभी कंपनी के मुनाफ़े से,
कभी वकीलो से,
कभी नेताओ से,
कभी जैसे हर समस्या को मेरी समस्या से तौल लेंगे वो,
कभी बैंको की कतारो से,
कभी हीरो हीरोइन के बचकाने बयानो को,
कभी आवाज़ उठाने वाले को मेरा "भार" बताया जाता है,
कभी मेरा ठंड में खड़ा होना सहनशीलता का मानक बन जाता है,
अरे साहब,
राजनैतिक समझ होती है हम में भी,
वोट हमारा भी होता है,
रोज़गार है हमारा,
देश से प्यार भी है,
पर फ़र्क नही पड़ता किसी को,
हमारे मर तक जाने से,
हम देशभक्ति के मानक नहीं हैं,
हम तुलना अछा नहीं लगता आपके वोट बढ़|ने के लिए,
हमारे खुद के हक के मुद्दे तो लटके हैं,
पर हमारा मूल्य केवल "नारों" में हैं,
हमारा भी टैक्स कटता है,
हम भी सवाल उठा सकते हैं,
पर उसको "बग़ावत" जैसा माना जाएगा फिर,
फिर अपनी गंभीरता को मेरे स्तर से उपर पा कर,
वो थोड़ा चुप हो गये,
कहने लगे "खैर जय हिंद" "माफ़ करना ज़रा हालात का थोड़ा भार था",
मैने कहा " जी , सही तो हैं आप," आख़िर में बोले,
सरकारें बदलते ही बस,
"हम बाँटो का भार बदल जाता है बस,
कुछ सरकारो में तो हम “बाँटो” को भी धर्म में बाँट कर भार दिया जाता है,
पर छोड़िए,
आप बताए कहाँ जा रहें हैं,"
मैं मन में व्यथा का वो पृष्ठ सहेज कर बोला,
"साहब, गाज़ियाबाद तक, बेटी के कॉलेज तक,"
फिर सिलसिले चलें बातो के और सफ़र जैसे छोटा हो गया,
गाजीयबाद आया,
हम उतरे,
उन्होने खिड़की से जाते हुए मुझे देखा,
"और सलाम करते हुए कहा, माफ़ कीजिएगा, धन्यवाद हमें मान देने का , जय हिंद"|
हफ्तों बाद भी वो जय हिंद गूँज सा रहा है,
पर शायद और कोई नही है जो सुन पाए