इंतज़ार में अजीब सा जादू होता है ,
जितना करो उतना इश्क़ निखरता है।।
मेहबूब आये या उनका जवाब आये ,
ये तब भी कहाँ खत्म होता है ।।
क्योंकि इसका कोई मकां नही,
कभी उनकी झलक पाने का,
कभी उनसे आँख मिलने का,
फिर उनसे रूबरू होने का,
और जब बात आगे बढे तो फिर,
इजहार-ए-दिल करने का इंतज़ार ।।
फिर उनके जवाब का ,
जवाब यही ना हो तो,
उनके दिल का पिघल जाने का।।
और यदि हां हो तो ,
उनका मेहबूब के रूप में दीदार का ,
पर कमबख्त दीदार से भी दिल कहाँ थमता है ।।
फिर उनके होंठो के जाम पीने का,
उसकी बाहों में कैद होने का,
इसकी कोई इंतहा नहीं।।
इन सबके बाद उनके बदन की तहरीरें पड़ने का,
रिश्ते के पूर्ण होने का ,
दो आत्मोओ के विलास का,
क़यामत आने के बाद भी
हर जन्म में उसे पाने का इंतज़ार ।।