होड़ लगी है चुनावी दौर में
कौन कितना पागल बनाता है
जनता को मनमोहक बातों से
कितना कौन पटाता है
कभी दाड़ी में
कभी टोपी में
कभी रूदाक्ष
कभी है गय्या
कभी हरा रंग
कभी भगवा रंग
कभी जमुना तो
कभी गंगा मैया
कोई राष्ट्रवाद
कोई वंशवाद
कोई हिंदू का
कोई मुस्लिम का
कोई सिख का
कोई दलित नाम का
डमरू कितना बजाता है
खेल है सब सत्ता का
यहाँ खोटा सिक्का भी चलता है
खानदानी चोर हो
या फटा ढोल हो
आवाज बहुत करता है
मिलता नहीं यहां भगवान को छप्पर
गधा महलों में मौज करता है
लेना क्या जनता से इनको
बेच चूर्ण ख्यालों का रोज ही
कभी इसका
तो कभी उसका
गला रोज ही कटता है
होड़ लगी है चुनावी दौर में
कौन कितना पागल बनाता है
जनता को मनमोहक बातों से
कितना कौन पटाता है ।
डॉ.विनोद कुमार
दिनांक: 9/10/2020


